Wo Nahi Mera Magar Ussey Mohabbat To Hai | वो नहीं मेरा मगर उससे मुहब्बत है तो है

A Beautiful Ghazal Wo Nahi Mera Magar Ussey Mohabbat To Hai, is sung by Ghulam Ali, Kavita Krishnamurti and pennned by Deepti Mishra

वो नहीं मेरा मगर उससे मुहब्बत है तो है
ये अगर रस्मों, रिवाज़ों से बग़ावत है तो है 

सच को मैंने सच कहा, जब कह दिया तो कह दिया
अब ज़माने की नज़र में ये हिमाकत है तो है 

कब कहा मैंने कि वो मिल जाये मुझको, मैं उसे 
गर न हो जाये वो बस इतनी हसरत है तो है 

जल गया परवाना तो शम्मा की इसमें क्या ख़ता
रात भर जलना-जलाना उसकी किस्मत है तो है

दोस्त बन कर दुश्मनों- सा वो सताता है मुझे
फिर भी उस ज़ालिम पे मरना अपनी फ़ितरत है तो है

दूर थे और दूर हैं हरदम ज़मीनों-आसमाँ 
दूरियों के बाद भी दोनों में क़ुर्बत है तो है4

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vo nahiin meraa magar usase muhabbat hai to hai
ye agar rasmon, rivaajon se bagaavat hai to hai

sach ko mainne sach kahaa, jab kah diyaa to kah diyaa
ab jmaane kii najr men ye himaakat hai to hai

kab kahaa mainne ki vo mil jaaye mujhako, main use
gar n ho jaaye vo bas itanii hasarat hai to hai

jal gayaa paravaanaa to shammaa kii isamen kyaa khtaa
raat bhar jalanaa-jalaanaa usakii kismat hai to hai

dost ban kar dushmanon- saa vo sataataa hai mujhe
fir bhii us jaalim pe maranaa apanii fitarat hai to hai

door the aur door hain haradam jmiinon-aasamaan

dooriyon ke baad bhii donon men kurbat hai to hai

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