साहिबा (फिल्लौरी) - Sahiba (Phillauri)


Song Title: Sahiba
Movie: Phillauri
Singers: Romy, Pawani Pandey
Lyrics: Anvita Dutt
Music: Shashwat Sachdev

तुझसे ऐसा उलझा
दिल धागा धागा खींचा..
दरगाह पे जैसे
हो चादरों सा बिछा

यूँ ही रोज़ ये उधड़ा बुना
किस्सा इश्क का
कई बार हमने फिर से लिखा..
साहिबा.. साहिबा..
चल वहां जहाँ मिर्ज़ा..

खली चिट्ठियां थी
तुझे रो रो के लगा
भेजी मोहर इश्कां की 
इश्कां की हाय..

कागज़ की कश्ती
मेरे दिल की थी 
डूबा बैठी नेहर 
अश्कां की.. हाए.. 

बेसुरे दिल की ये धुन 
करता गले ले तू सुन्न 
आई ना तो 
तू ही पहचाने ना 
जो हूँ वो माने ना 
जा अजनवी तू बन अभी 

हेंख है दिल में उठी 
आलापों सी है बजी 
साँसों में तू मद्धम से रागों सा 
केसर के धागों सा 
यूँ घुल गया 
मैं घूम गया 

ओ.. दिल पे धुंधला सा 
सलेटी रंग कैसा सा चढ़ा.. 
आ.. 

तुझसे ऐसा उलझा 
दिल धागा धागा खींचा 
दरगाह पे जैसे हो 
चादरों सा बिछा 
यूँ ही रोज़ ये उधड़ा बुना 
किस्सा इश्क का 
कई बार हमने फिर से लिखा.. 

साहिबां.. साहिबां.. 
चल वहां जहाँ मिर्ज़ा ..
ओ साहिबां.. 

ओ साहिबां.. 
हिज्र की चोट है लागी रे 
ओ साहिबां.. 
जिगर हुआ है बागी रे 
जिद्द बेहद हुई 
रटती है जुबां 

ओ तेरे बिना.. 
ओ तेरे बिना 
सांस भी कांच सी, 
कांच सी काटे, 
काटे रे 
ओ तेरे बिन 
जिन्दी दी राख सी, 
राख सी लागे रे

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Tujhse aisa uljha dil 
dhagaa dhagaa khincha 
tujhse aisa uljha, 
dil dhagaa dhagaa khincha 
dargah pe jaisa ho 
chadron sa bicha 
yun hi roz yeh 
ugdha buna kissa 
ishq ka kai baar 
humne phir se likha.. 
sahiba…sahiba.. 
chal wahan jahan mirza.. 
sahiba…sahiba.. 
chal wahan jahan mirza.. 

khali chithiyan thi, 
tujhe ro ro ke laga bhaje, 
mohar ishqan ki..
ishqa ki.. haaye.. 
kaagaz ki kashti 
mere dil ki thi 
duba baithi nehar 
ishqka ki, haaye.. 

besure dil ki 
yeh dhun krta 
gale le tu sunn aayi 
na toh tu hi pehchane 
na jo hoon woh mane 
na na ajnavi tu ban abhi 

henkh dil mein uthi 
alapaon si hai baji 
saanon mein tu madham se 
raagon sa kesar ke dhaagon say 
un ghul gaya main ghum gaya

o.. dil pe dhundhla sa 
saleti rang kaisa sa chadha
.. aa.. tujhse aisa uljha 
dil dhagaa dhagaa khincha 
dargah pe jaisa ho 
chadron sa bicha 

yun hi roz yeh 
ugdha buna qissa 
ishq ka kai baar humne 
phir se likha.. 
sahiban…sahiban.. 
chal wahan jahan mirza.. 
sahiban…sahiban.. 
chal wahan jahan mirza.. 
o sahiban.. o sahiban.. 

hijar ki chot hai laagi re 
o sahiban.. 
jigar hua hai baaghi re 
zidd behad hui 
rat’ti hai zubaan o tere bina.. 
o tere bina 
saans bhi 
kanch si, kanch si 
kaate, kaate re 
o tere bina 
jind’di raakh si, 
raakh si laage re 
o tere bina 
saans bhi 
kanch si, kanch si 
kaate, kaate re 
o tere bina 
jind’di raakh si,
 raakh si laage re



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