Ijazat

फिल्म: इजाज़त
गाना: मेरा कुछ सामान
संगीतकार: आर.डी बर्मन
गीतकार: गुलज़ार
गायिका: आशा भोंसले


आ आ आ...
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
ओ सावन के कुछ भीगे भीगे दिन रखे हैं
और मेरे एक खत में लिपटी रात पड़ी है
वो रात बुझा दो, मेरा वो सामान लौटा दो 
वो रात बुझा दोमेरा वो सामान लौटा दो 
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
ओ सावन के कुछ भीगे भीगे दिन रखे हैं
और मेरे एक खत में लिपटी रात पड़ी है
वो रात बुझा दोमेरा वो सामान लौटा दो 


पतझड़ है कुछ ... है ना ?
ओ ! पतझड़ में कुछ पत्तों के गिरने की आहट
कानों में एक बार पहन के लौट आई थी
पतझड़ की वो शाख अभी तक कांप रही है
वो शाख गिरा दो, मेरा वो सामान लौटा दो 
वो शाख गिरा दोमेरा वो सामान लौटा दो

एक अकेली छतरी में जब आधे आधे भीग रहे थे
एक अकेली छतरी में जब आधे आधे भीग रहे थे
आधे सूखे आधे गीले, सूखा तो मैं ले आयी थी
गीला मन शायद बिस्तर के पास पड़ा हो 
वो भिजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो

एक सौ सोलह चाँद की रातें एक तुम्हारे कांधे का तिल
एक सौ सोलह चाँद की रातें एक तुम्हारे कांधे का तिल 
गीली मेंहदी की खुशबू, झूठ-मूठ के शिकवे कुछ
झूठ-मूठ के वादे भी सब याद करा दूँ
सब भिजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो 
सब भिजवा दोमेरा वो सामान लौटा दो 

एक इजाज़त दे दो बस, जब इसको दफ़नाऊँगी
मैं भी वहीं सो जाऊंगी

मैं भी वहीं सो जाऊंगी

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