पीनाज़ मसानी




जब मेरी याद सताए तो मुझे ख़त लिखना
जब मेरी याद सताए तो मुझे ख़त लिखना
तुम को जब नींद न आए तो मुझे ख़त लिखना
जब मेरी याद सताए तो मुझे ख़त लिखना

नीले पेड़ों की घनी छाँव में हँसता सावन,
प्यासी धरती में समाने को तरसता सावन,
रात भर छत पे लगातार बरसता सावन,
दिल में जब आग लगाए तो
दिल में जब आग लगाए तो मुझे ख़त लिखना
तुम को जब नींद न आए तो मुझे ख़त लिखना

जब फड़क उठे किसी शाख़ पे पत्ता कोई,
गुदगुदाए तुम्हें बीता हुआ लम्हा कोई,
जब मेरी याद का बेचैन सफ़ीना कोई,
जी को रह-रह के जलाए तो
जी को रह-रह के जलाए तो मुझे ख़त लिखना
तुम को जब नींद न आए तो मुझे ख़त लिखना

जब निगाहों के लिये कोई नज़ारा न रहे,
चाँद छिप जाए गगन पर कोई तारा  न रहे,
भरे संसार में जब कोई सहारा न रहे
लोग हो जाएँ पराए तो
लोग हो जाएँ पराए तो मुझे ख़त लिखना
तुम को जब नींद न आए तो मुझे ख़त लिखना
जब मेरी याद सताए तो मुझे ख़त लिखना



Post a Comment

0 Comments