वो भूली दास्तां, लो फिर याद आ गयी


फिल्म-संजोग 
संगीतकार- मदन मोहन
गीतकार-राजेन्द्र कृष्ण 
गायक- लता मंगेशकर

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गई
वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गई
नज़र के सामने घटा सी छा गयी
नज़र के सामने घटा सी छा गयी
वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी

कहाँ से फिर चले आये, ये  कुछ भटके हुए साये
ये कुछ भूले हुए नग़मे, जो मेरे प्यार ने गाये
ये कुछ बिछुड़ी हुई यादें, ये कुछ टूटे हुए सपने 
पराये हो गये तो क्या, कभी ये भी तो थे अपने
न जाने इनसे क्यों मिलकर, नज़र शर्मा गयी
वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी

उम्मीदों के हंसी मेले, तमन्नाओं के वो रेले
निगाहों ने निगाहों से, अजब कुछ खेल से खेले
हवा में ज़ुल्फ़ लहराई, नज़र पे बेखुदी छाई
खुले थे दिल के दरवाज़े, मुहब्बत भी चली आई
तमन्नाओं की दुनिया पर, जवानी छा गयी
वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी

बड़े रंगीन ज़माने थे, तराने ही तराने थे
मगर अब पूछता है दिल, वो दिन थे या फ़साने थे
फ़क़त इक याद है बाकी, बस इक फ़रियाद है बाकी
वो खुशियाँ लुट गयी लेकिन, दिल--बरबाद है बाकी
कहाँ थी ज़िन्दगी मेरी, कहाँ पर आ गयी


वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गई

नज़र के सामने घटा सी छा गयी
नज़र के सामने घटा सी छा गयी
वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी
वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी



फिल्म-संजोग 
संगीतकार- मदन मोहन
गीतकार-राजेन्द्र कृष्ण 
गायक- लता मंगेशकर, मुकेश 


एक मंजिल राही दो फिर प्यार ना कैसे हो
 साथ मिले जब दिल को फिर प्यार ना कैसे हो 

 हम भी वो ही हैं, दिल भी वो ही हैं, धड़कन मगर नई हैं 
 देखो तो मीत, आँखों में प्रीत, क्या रंग भर गयी हैं निकले हैं 

धून में, अपनी लगन में मंजिल बुला रही हैं 
 ठंडी हवा भी अब तो मिलन के नग्मे सुना रही हैं 

 देखो वो फूल, दुनियाँ से दूर, आकर कहा खिला हैं 
 मेरी तरह ये खुश हैं जरूर इसको भी कुछ मिला हैं


फिल्म-संजोग 
संगीतकार- मदन मोहन
गीतकार-राजेन्द्र कृष्ण 
गायक- लता मंगेशकर

बदली से निकला है
चाँद परदेसी पिया लौट के तू घर आजा 

 पूछे पता तेरा ठंडी हवायें 
 चुप मुझे देख के चुप हो जाये 
 लाये तो कैसे तुझे ढूँढ के लाये 

 आ के गुजर गयी कितनी बहारें 
 और बरस गयी कितनी पुहारें 
 आ जा तुझे हम कब से पुकारे

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