कह-मुकरियाँ(२) - आमिर खुसरो और भारतेन्दु हरिश्चंद्र

कुछ और कह-मुकरियाँ  आमिर खुसरो की...


१. अर्ध निशा वह आया भौन
सुंदरता बरने कवि कौन
निरखत ही मन भयो अनंद
ऐ सखि साजन? ना सखि चंद!

२. शोभा सदा बढ़ावन हारा
आँखिन से छिन होत न न्यारा
आठ पहर मेरो मनरंजन
ऐ सखि साजन? ना सखि अंजन!

३. जीवन सब जग जासों कहै
वा बिनु नेक न धीरज रहै
हरै छिनक में हिय की पीर
ऐ सखि साजन? ना सखि नीर!

४. बिन आये सबहीं सुख भूले
आये ते अँग-अँग सब फूले
सीरी भई लगावत छाती
ऐ सखि साजन? ना सखि पाती!

५. सगरी रैन छतियां पर राख
रूप रंग सब वा का चाख
भोर भई जब दिया उतार
ऐ सखि साजन? ना सखि हार!

६. पड़ी थी मैं अचानक चढ़ आयो
जब उतरयो तो पसीनो आयो
सहम गई नहीं सकी पुकार
ऐ सखि साजन? ना सखि बुखार!

७. सेज पड़ी मोरे आंखों आए
डाल सेज मोहे मजा दिखाए
किस से कहूं अब मजा में अपना
ऐ सखि साजन? ना सखि सपना!

८. बखत बखत मोए वा की आस
रात दिना ऊ रहत मो पास
मेरे मन को सब करत है काम
ऐ सखि साजन? ना सखि राम!

९. सरब सलोना सब गुन नीका
वा बिन सब जग लागे फीका
वा के सर पर होवे कोन
ऐ सखि ‘साजन’ना सखि! लोन(नमक)

१०. सगरी रैन मिही संग जागा
भोर भई तब बिछुड़न लागा
उसके बिछुड़त फाटे हिया’
ए सखि ‘साजन’ ना, सखि! दिया(

११राह चलत मोरा अंचरा गहे।
मेरी सुने न अपनी कहे
ना कुछ मोसे झगडा-टंटा
ऐ सखि साजन ना सखि कांटा

१२.बरसा-बरस वह देस में आवे,
मुँह से मुँह लाग रस प्यावे।
वा खातिर मैं खरचे दाम,
ऐ सखि साजन न सखि! आम

१३नित मेरे घर आवत है,
रात गए फिर जावत है।
मानस फसत काऊ के फंदा,
ऐ सखि साजन न सखि! चंदा

१४.
आठ प्रहर मेरे संग रहे,
मीठी प्यारी बातें करे
श्याम बरन और राती नैंना,
ऐ सखि साजन न सखि! मैंना

१५.घर आवे मुख घेरे-फेरे,
दें दुहाई मन को हरें,
कभू करत है मीठे बैन,
कभी करत है रुखे नैंन
ऐसा जग में कोऊ होता,
ऐ सखि साजन न सखि! तोता

साथ ही कुछ और कह मुकरियां, भारतेन्दु जी की 



१ 
रूप दिखावत सरबस लूटै
फंदे मैं जो पड़ै न छूटै
कपट कटारी जिय मैं हुलिस
क्यों सखि साजन ? नहिं सखि पुलिस!

२.
एक गरभ मैं सौ सौ पूत
जनमावै ऐसा मजबूत
करै खटाखट काम सयाना
का सखि साजन ? नहिं छापाखाना!

३.
सतएँ अठएँ मों घर आवै
तरह तरह की बात सुनावै
घर बैठे ही जोड़ै तार
क्यों सखि सजन ? नहिं अखबार!


नई नई नित तान सुनावै
अपने जाल मैं जगत फँसावै
नित नित हमैं करै बल-सून
क्यों सखि साजन ? नहिं कानून!

५.
लंगर छोड़ि खड़ा हो झूमै
उलटी गति प्रति कूलहि चूमै
देस देस डोलै सजि साज
क्यों सखि साजन ? नहीं जहाज!

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